सोनभद्र-उत्तरप्रदेश

खराब हैंडपंप, ग्रामीण परेशान — कोटा ग्राम पंचायत में लापरवाही चरम पर

उत्तर प्रदेश || सोनभद्र-डाल || आपको बता दें कि पूरा मामला उत्तर प्रदेश राज्य के‌ सोनभद्र जिले के ग्राम पंचायत कोटा में इन दिनों ग्रामीण पेयजल की समस्या से परेशान हैं। गांव के कई मोहल्लों में महीनों से हैंडपंप और सोलर वाटर पंप खराब पड़े हैं, लेकिन मरम्मत के लिए अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।

जहां ग्रामीणों का कहना है कि हर साल हैंडपंप सामग्री व रिपेयरिंग के नाम पर ग्राम पंचायत में लाखों रुपये भेजे जाते हैं, फिर भी पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा बदहाल है।
ग्राम पंचायत सदस्य एवं युवा समाजसेवी कन्हैया लाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान कई जगह हैंडपंपों के खराब होनें की शिकायतें मिलीं। समय-समय पर पंचायत को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्राम पंचायत कोटा में प्रेमनाथ के घर के सामनें लगाया गया सोलर वाटर पंप भी लापरवाही की कहानी बयां करती नज़र आ रही है। जहां कुछ ही दिनों में यह पंम्प खराब हो गया और रिपेयरिंग के नाम पर हजारों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन पंप अब भी लगातार खराब रहता है — कभी चलता है तो कभी अचानक बंद हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्य गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
गांव में कई और हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं—

वार्ड नं. 1 में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मोती भारती के घर के पास हैंडपंप लंबे समय से बंद है।
सुरेश खरवार के घर के पास स्थित हैंडपंप बंद पड़े रहने से लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।वही दशरथ शर्मा के घर के पास का हैंडपंप भी कई माह से खराब है।
कन्हैया कुमार का कहना है कि जब हर महीने हैंडपंप सामग्री व मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान दर्शाया जाता है, तो फिर गांव में पेयजल व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों है? आखिर यह पैसा कहां खर्च हो रहा है?
इसी तरह मझौली कोटा में राम अवध भारती के घर के पास नल कनेक्शन टूटा हुआ है। कई बार शिकायत करनें के बावजूद जिम्मेदारों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि पानी एक मूलभूत आवश्यकता है और इस पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गांव वालों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सभी खराब हैंडपंप व सोलर पंपों की मरम्मत कराई जाए और कथित अनियमितताओं की जांच कराई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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