
छत्तीसगढ़-बलरामपुर || आपको बता दें कि पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड में स्थित वाड्रफनगर सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल परिसर में कबाड़ के ढेर में भारी मात्रा में इंजेक्शन, टेबलेट्स और अन्य दवाइयाँ फेंकी हुई पाई गईं, जो कि एक्सपायरी डेट निकल जाने के बावजूद अब तक विधिवत रूप से डिस्पोज नहीं की गई हैं।

यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के अनुसार एक्सपायरी दवाइयों का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण (डिस्पोजल) किया जाना अनिवार्य होता है, ताकि उनका दुरुपयोग न हो और न ही किसी प्रकार की जनहानि की स्थिति बने। लेकिन वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में इस तरह खुले में पड़ी एक्सपायरी दवाइयाँ कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन दवाइयों को असामाजिक तत्व उठा सकते हैं, या फिर गलती से किसी जरूरतमंद या बच्चे के हाथ लग जाने पर गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में लंबे समय से एक्सपायरी दवाइयों के निस्तारण की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया जा रहा है। समय-समय पर निरीक्षण और मॉनिटरिंग के अभाव में यह लापरवाही लगातार बढ़ती चली गई। अब जब मामला उजागर हुआ है, तो स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर सवाल उठना लाजमी है।

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है।
फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं और क्या एक्सपायरी दवाइयों के सुरक्षित निस्तारण के लिए ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।











