

छत्तीसगढ़-बलरामपुर || नगरपालिका परिषद बलरामपुर की प्रस्तावित सामान्य बैठक आज लगातार दूसरी बार निरस्त हो गई, जिससे नगर के विकास कार्यों और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय नहीं हो सका। बैठक निरस्त होने से शहर में चल रही विभिन्न अधोसंरचनात्मक योजनाओं, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण एवं अन्य आवश्यक कार्यों पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। इस घटनाक्रम से आम नागरिकों में निराशा और असंतोष व्याप्त है।

बताया जा रहा है कि परिषद के सभी पार्षद वर्तमान मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) के कार्यशैली के विरोध में एकजुट होकर राजधानी रायपुर में डटे हुए हैं। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि परिषद की बैठकों में आवश्यक समन्वय का अभाव है और विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा एवं सहमति की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा।

पार्षदों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल परिषद की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी ठेस पहुंच रही है। उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के लंबित रखे गए हैं, जिससे नगर विकास की गति धीमी पड़ गई है।
रायपुर में धरना दे रहे पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित सीएमओ को तत्काल प्रभाव से पद से नहीं हटाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने राज्य शासन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि नगरहित को सर्वोपरि रखते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए तथा एक सक्षम, पारदर्शी और समन्वयकारी अधिकारी की पदस्थापना की जाए, जो परिषद और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके।
पार्षदों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि नगर के समुचित विकास, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा करना है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
उधर, नगर के नागरिकों और सामाजिक संगठनों की निगाहें अब शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। विकास कार्यों में आ रही रुकावट और प्रशासनिक गतिरोध को देखते हुए आमजन शीघ्र समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।










