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हरिपुर में ‘सरपंच’ का गुंडाराज खत्म: रिटायर्ड शिक्षक और परिवार पर जानलेवा हमले के बाद सरपंच समेत 9 आरोपी सलाखों के पीछे….

सूरजपुर-छत्तीसगढ़ || सूरजपुर हरिपुर समाज सेवा गांव की चौपाल से विकास की गाथा लिखी जानी चाहिए थी, लेकिन हरिपुर के सरपंच ओम प्रसाद ने उसे आतंक का अखाड़ा बना दिया। एक रिटायर्ड शिक्षक और उनके दो बच्चों पर जानलेवा हमला कर अपनी सत्ता का प्रदर्शन करने वाले सरपंच, उसके दो बेटों और सहयोगियों को आखिरकार पुलिस ने जेल की कालकोठरी तक पहुंचा दिया है।

                     सरपंच

निर्दोष परिवार पर टूटा सरपंच का ‘कहर’
ग्राम हरिपुर के सरपंच ओम प्रसाद, उसके पुत्रों मनोज और रौशन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर एक सेवानिवृत्त शिक्षक और उनके दो बेटों पर प्राणघातक हमला किया। हमले की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षक और उनके पुत्रों को अत्यंत गंभीर चोटें आई हैं। आरोपियों ने शिक्षा की गरिमा को तार-तार करते हुए एक बुजुर्ग और उनके परिवार को लहूलुहान कर दिया।

                       सागर सिंह

पुलिस की सक्रियता: चौकी प्रभारी और प्रधान आरक्षक की तत्परता से मिला न्याय
इस पूरे मामले में चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह और प्रधान आरक्षक रजनीश सिंह की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। घटना की सूचना मिलते ही दोनों अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझा और बिना किसी दबाव के त्वरित कार्रवाई शुरू की।

               सरपंच और उसके गुर्गे

चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह के कुशल नेतृत्व और प्रधान आरक्षक रजनीश सिंह की सक्रियता के कारण ही आरोपियों की घेराबंदी कर उन्हें दबोचा जा सका। पुलिस की इसी तत्परता ने न केवल पीड़ित परिवार को सुरक्षा का अहसास कराया, बल्कि अपराधियों के मन में कानून का खौफ भी पैदा किया। ग्रामीणों का मानना है कि यदि पुलिस प्रशासन इतनी मुस्तैदी नहीं दिखाता, तो रसूखदार आरोपी जांच को प्रभावित कर सकते थे।
हत्या के प्रयास का मामला दर्ज, 9 गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
जेल भेजे गए आरोपियों की सूची:
ओम प्रसाद (सरपंच)
मनोज (सरपंच का पुत्र)
रौशन (सरपंच का पुत्र)
गौरव
नवल साय
सागर सिंह
गोविंद
सुन्दर
प्रीतम

                     सरपंच का बेटा

विकास नहीं, विनाश की मानसिकता
ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच ओम प्रसाद शुरू से ही आपराधिक मानसिकता का व्यक्ति रहा है। उस पर पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। एक अपराधी के हाथ में गांव की कमान आने का नतीजा यह हुआ कि गांव का विकास पूरी तरह ठप हो गया। फिलहाल, पुलिस फरार अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

पीछे सरपंच का बेटा और एक और आरोपी प्रीतम सिंह

संपादकीय टिप्पणी: चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह और प्रधान आरक्षक रजनीश सिंह जैसे अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा ही आम जनता का कानून पर विश्वास बनाए रखती है। अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजकर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वर्दी के सामने कोई भी ‘सरपंच’ या ‘बाहुबली’ कानून से बड़ा नहीं है।

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