
छत्तीसगढ़-बलरामपुर || आपको बता दें कि पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का है जहां बलरामपुर जिला अंन्तर्गत आनें वाला जनपद पंचायत वाड्रफनगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत – बरती खुर्द इन दिनों एक बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ है। गांव में बिना किसी प्रस्ताव, बिना शासकीय स्वीकृति और बिना ग्रामीणों से चर्चा के चार हैंडपंपों की खुदाई कर दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सारा काम सरपंच भारत सिंह द्वारा पंचों के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जबकि ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतें पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई हैं।

ग्राम पंचायत के सचिव त्रिलोकी नाथ पटेल से जब फोन पर जानकारी ली गई तो उन्होंने साफ कहा कि “हमें हैंडपंप खनन की किसी भी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है। न तो कोई प्रस्ताव आया है और न ही कोई प्रशासकीय स्वीकृति। सरपंच अपनी मनमानी से खुदाई करा रहे हैं और इसका कोई लेखा-जोखा हमारे पास नहीं है।”

सचिव के इस बयान ने ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी भर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की निधि को लेकर गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं। उनका आरोप है कि शासकीय मद की राशि का गलत उपयोग करने और निजी हित साधने की कोशिश हो रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि गांव में हैंडपंप की जरूरत थी, तो उसके लिए प्रक्रिया अनुसार प्रस्ताव बनकर, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के बीच चर्चा के बाद ही कार्य होना चाहिए था।

ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर हैंडपंप लगाए गए हैं, वह गांव के जरूरतमंद क्षेत्रों में नहीं आता, बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इसे किया गया है। स्थानीय लोगों ने इस मनमानी को पंचायती व्यवस्था के खिलाफ कदम बताया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता और इस पूरे मामले की जांच नहीं की जाती, तो वे उच्च अधिकारियों तक शिकायत लेकर जाएंगे और आवश्यक होने पर आंदोलन भी करेंगे |
ग्रामीणों की मांगें —
1.- हैंडपंप खनन की पूरी जांच की जाए।
2.- बिना प्रस्ताव और बिना स्वीकृति किए गए कार्य पर कार्रवाई हो।
3.- पंचायत निधि के लेखा-जोखा को सार्वजनिक किया जाए।
4.- आगे से किसी भी विकास कार्य से पहले ग्रामीणों की सहमति और ग्रामसभा का प्रस्ताव अनिवार्य किया जाए।
जहां ग्राम पंचायत बरती खुर्द में यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और ग्रामीणों की नाराजगी प्रशासन के लिए चुनौती बनती दिख रही है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों के आक्रोश को कैसे शांत करता है।











