बलरामपुर D.E.O पर आरोपों का तूफान ! अंतिम निर्णय से पहले ही उठे रहे है सवाल, क्या हो रही है छवि खराब करनें की कोशिश ?
दस्तावेजों में ऑनलाइन प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण का दावा




साइंस किट की खरीदी भी राज्य स्तर से डायरेक्टरेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत की गई। संबंधित फर्म द्वारा संस्थानों में साइंस किट की आपूर्ति की गई, जिसकी प्राप्ति संबंधी पावती उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके बाद टीम के माध्यम से सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण एवं फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित सामग्री का भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से किए जाने की जानकारी सामने आई है।
4.51 करोड़ के भुगतान पर बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी D.E.O मनीराम यादव ने रखा अपना पक्ष —
जब इस पूरे मामले में बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से बात कि गई तो उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में किए गए क्रय के भुगतान की कुल राशि 45,166,159 रुपये को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। विज्ञप्ति के अनुसार, जांच दल द्वारा इस राशि को कथित रूप से शासकीय राशि के गबन से जोड़कर बताया जा रहा है। डीईओ ने कहा है कि जांच दल द्वारा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के तत्काल बाद यह मामला सोशल मीडिया में वायरल हुआ तथा सोशल मीडिया न्यूज एवं समाचार पत्रों में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गबन किए जाने संबंधी खबरें सामने आईं।
जहां इस संदर्भ में बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी D.E.O मनीराम यादव ने बताया कि अधिकांश सामग्रियों का क्रय आदेश शासन स्तर से स्वीकृत किया गया था। उनके अनुसार सामग्री प्राप्त होने के बाद उसकी पावती, भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के पश्चात नियमानुसार भुगतान हेतु देयक जिला कोषालय कार्यालय बलरामपुर को प्रेषित किए गए थे। उन्होंने कहा कि जिला कोषालय द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के छोटे-छोटे स्वत्वों के भुगतान में भी कई बार आपत्तियां लगाई जाती हैं, ऐसे में इतनी बड़ी शासकीय राशि के भुगतान में कोषालय द्वारा निश्चित रूप से परीक्षण किया गया होगा।
जहां बलरामपुर डीईओ ने यह भी कहा है कि जांच दल द्वारा उनके ऊपर लगाए गए आरोपों का समाधानकारक उत्तर कलेक्टर के समक्ष शीघ्र ही अभिलेखों सहित प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा जांच दल को अपने कार्यालय में क्रय से संबंधित समस्त नस्तियां मूल रूप में सौंप दी गई थीं। इसके बावजूद जांच दल द्वारा राशि का गबन उनके द्वारा किया जाना प्रतिवेदित किया गया है, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जांच दल के दोनों अधिकारी वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अधिकारी हैं और मामले के वास्तविक तथ्यों की जानकारी उनके द्वारा ही स्पष्ट की जा सकती है।
जहां इस संदर्भ में बताया गया है कि साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री सहित विभिन्न मदों में की गई खरीदी में ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई तथा सामग्री की आपूर्ति, पावती, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई। ऐसे में खरीदी को लेकर सामने आ रहे आरोपों की वास्तविकता अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बलरामपुर जिला शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट का भी दावा —
इधर, विभागीय जानकारों का दावा है कि बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले की शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लानें के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, नियमित मॉनिटरिंग और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक निगरानी बढ़ने के बाद शिक्षकों के समय पर विद्यालय पहुंचने की व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिला है।
फिलहाल अभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष सामनें आनें से पहले बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। जहां उच्च अधिकारियों के द्वारा आगे की जांच लगातार जारी है।










