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64 पट्टाधारी किसानों ने SDM न्यायालय का खटखटाया दरवाजा, किसानों नें वन विभाग पर खेती रोकनें और ट्रैक्टर जब्त करनें का लगाया आरोप

पट्टाधारी किसानों ने कहा -1954 से कर रहे हैं खेती, वन विभाग की कार्यवाही से खरीफ सीजन हो रही है प्रभावित

छत्तीसगढ़ || बलरामपुर-वाड्रफनगर || आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रघुनाथनगर तहसील अंतर्गत ग्राम गिरवानी के 64 पट्टाधारी किसानों ने वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वाड्रफनगर के न्यायालय में सामूहिक आवेदन प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई है। किसानों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी पट्टे की भूमि पर चल रही जोताई को रोक दिया और खेत में काम कर रहे ट्रैक्टर को जब्त कर लिया, जिससे खरीफ सीजन की खेती प्रभावित हो रही है।जहां आवेदन के अनुसार प्रेमकुमार जायसवाल सहित कुल 64 ग्रामीणों ने एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन में बताया है कि उन्हें ग्राम गिरवानी स्थित भूमि पर सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख, वाड्रफनगर द्वारा प्रकरण क्रमांक 48 अ-19(1) के तहत भूमि स्वामी अधिकार की मंजूरी देते हुए पट्टा प्रदान किया गया था। किसानों का कहना है कि वे इस भूमि पर वर्ष 1954 से लगातार काबिज होकर कृषि कार्य करते आ रहे हैं।किसानों ने अपनें आवेदन में उल्लेख किया है कि वर्षों की कड़ी मेहनत और आर्थिक निवेश से उन्होंने ऊबड़-खाबड़ एवं अनुपजाऊ भूमि को समतल कर खेती योग्य बनाया। वर्तमान में इसी भूमि पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस वर्ष खरीफ फसल की तैयारी के तहत ट्रैक्टर से खेतों की जोताई कराई जा रही थी, तभी वन विभाग रघुनाथनगर का अमला मौके पर पहुंच गया और जोताई कार्य पर रोक लगा दी।जहां आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन विभाग रघुनाथ नगर ने खेत में चल रहे ट्रैक्टर को जब्त कर लिया और किसानों को आगे खेती करनें से रोक दिया।जहां किसानों का कहना है कि उनके पास विधिवत पट्टा होने के बावजूद इस प्रकार की कार्रवाई की गई, जिससे खेती का कार्य पूरी तरह बाधित हो गया है। यदि समय पर जोताई नहीं हो सकी तो खरीफ फसल की बुआई प्रभावित होगी और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने एसडीएम न्यायालय से मांग की है कि वन विभाग द्वारा जब्त किए गए ट्रैक्टर को तत्काल रिहा करनें का आदेश दिया जाए तथा पट्टे की भूमि पर कृषि कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाए।वहीं इसके साथ ही उन्होंने राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त जांच कराकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा वन विभाग द्वारा लगाई गई रोक को हटाने की भी मांग की है।आवेदन में किसानों ने यह भी कहा है कि उन्हें वैधानिक प्रक्रिया के तहत भूमि स्वामी अधिकार प्राप्त हुआ है, इसलिए उन्हें अपनी भूमि पर खेती करने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने न्यायालय से शीघ्र हस्तक्षेप कर किसानों के हित में आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।अब यह मामला एसडीएम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। न्यायालय दोनों पक्षों के दस्तावेज, अभिलेख और तथ्यों का परीक्षण करनें के बाद आगे की कार्यवाही करेगा।(नोट – यह समाचार किसानों द्वारा वाड्रफनगर एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर आधारित है। वन विभाग का पक्ष आनें पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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