CrimeNationalTrendingछत्तीसगढ़सरगुजासरगुजा-अम्बिकापुरस्वास्थ्य

अंबिकापुर में इलाज के नाम पर ‘सौदा’ और मरीज के जान से हुआ खिलवाड़ : श्री महावीर हॉस्पिटल पर 7 लाख की अवैध वसूली और मौत का आरोप!

आयुष्मान कार्ड दरकिनार, ऐंठे लाखों रुपये; फेफड़े सड़ाने और साक्ष्य मिटाने का सनसनीखेज आरोप कलेक्टर, एसपी और सीएमएचओ के पास पहुंची शिकायत : विशेष मेडिकल बोर्ड जांच और फिर की मांग

छत्तीसगढ़-सरगुजा || अंबिकापुर || आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों और आरोपों के घेरे में है। इलाज में घोर लापरवाही, आयुष्मान योजना के बावजूद मरीजों के परिजनों से लाखों की अवैध वसूली, और मरीज की मौत के बाद साक्ष्य (मेडिकल रिकॉर्ड) छिपाने का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ ‘वसूली’ और लापरवाही का खेल — जहां सुभाषनगर निवासी 24 वर्षीय युवक आशुतोष दास को 13 जून 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद श्री महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने दबाव बनाकर नगद और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए 6 से 7 लाख रुपये की अवैध वसूली की।गलत इलाज से सड़े फेफड़े (Lung Abscess), तड़प-तड़पकर हुई मौत — वहीं 11 अगस्त को डिस्चार्ज के बाद 30 अगस्त को मरीज को चेकअप के लिए ले जाया गया अस्पताल। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही और घटिया देखभाल की वजह से मरीज के फेफड़ों में भयंकर संक्रमण फैल गया और फेफड़ों में फोड़े (Lung Abscess) बन गए।परिजनों के मिन्नतों के बाद भी डॉक्टर शैलेन्द्र गुप्ता को हॉस्पिटल प्रबंधन ने नहीं बुलाया। — 02 सितंबर को बिना स्थिति का सही आंकलन किए ट्रैकियोस्टमी ट्यूब (Tracheostomy Tube) निकाल दी गई, जिससे मरीज सांस के लिए तड़पनें लगा।3 सितंबर की देर रात 11 बजे अचानक रायपुर रेफर करने की बात कही गई, लेकिन कागजी खानापूर्ति और सीटी स्कैन के नाम पर सुबह 5:30 बजे तक वक्त बर्बाद किया गया। मरणासन्न हालत में रेफर किए गए आशुतोष ने रायपुर पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया।साक्ष्य मिटानें में जुटा अस्पताल प्रबंधन ? — जहां युवक की मौत के बाद जब परिजनों ने सीटी स्कैन की सीडी/फिल्म, एक्स-रे और ट्रांसफर/डेथ समरी मांगी, तो अस्पताल प्रशासन ने साफ इनकार कर दिया और केवल अधूरी केस शीट थमा दी। परिजनों का आरोप है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अस्पताल अपनी आपराधिक लापरवाही को छिपाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर रहा है।परिजनों की जिला प्रशासन से सीधी मांग —

1.- मेडिकल बोर्ड का गठन — मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञों का निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।

2.- रिकॉर्ड्स की जब्ती — साक्ष्य मिटाने से रोकने के लिए श्री महावीर हॉस्पिटल से सीटी स्कैन, एक्स-रे और डेथ समरी के मूल दस्तावेज तुरंत जप्त किए जाएं।

3.- डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा — जान से खिलवाड़ करने, अवैध वसूली और साक्ष्य छिपानें के आरोप में दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!