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पत्रकारों का प्रशासन के खिलाफ बड़ा कदम, पत्रकारों नें जिला स्तरीय कार्यक्रमों व शासन-प्रशासन की खबरों से अनिश्चितकालीन रूप किया बहिष्कार

छत्तीसगढ़-बलरामपुर || आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पत्रकारों ने जिला प्रशासन की उपेक्षा और सम्मान की कमी को लेकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिले के दोनों सक्रिय प्रेस क्लब और पत्रकार कल्याण संघ ने संयुक्त रूप से घोषणा की है कि वे अब जिला स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों की खबरों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे।

नाराज़गी की वजह 

पत्रकारों का कहना है कि प्रशासन लगातार उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है।

समाचार संकलन में सहयोग की कमी – अधिकारी मीडिया से बातचीत करनें से कतराते हैं। यदि बयान दिया भी जाता है, तो बाद में टी.एल. (Time Limit) मीटिंग में उन अधिकारियों को फटकार लगाई जाती है। इससे अधिकारी भी मीडिया से दूरी बनानें लगे हैं।

सम्मान का अभाव – जिला स्तरीय कार्यक्रमों में पत्रकारों को न तो उचित आमंत्रण मिलता है, न ही बैठने की व्यवस्था या मंच से सम्मान।

प्रशासनिक उपेक्षा – कई बार पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों को टाल दिया जाता है या जवाब देनें से साफ़ मना कर दिया जाता है।

भौगोलिक और व्यावहारिक चुनौतियाँ

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला आदिवासी बहुल और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाका है। यहाँ के पत्रकार जब किसी खबर या कार्यक्रम की कवरेज के लिए जिला मुख्यालय तक आते हैं, तो उनका पूरा दिन खर्च हो जाता है।

लंबे सफर की थकान, आर्थिक बोझ (यातायात का खर्च), समय की बर्बादी, इन परिस्थितियों में यदि प्रशासन पत्रकारों को सम्मानजनक स्थान न दे, तो असंतोष और बढ़ना तय है।

प्रेस क्लबों व पत्रकार महासंघ की संयुक्त कार्यवाही

इन समस्याओं से तंग आकर जिले के प्रेस क्लब बलरामपुर और प्रेस क्लब पत्रकार कल्याण संघ ने एकजुट होकर ऐलान किया।

“जिला प्रशासन की उदासीनता और पत्रकारों के साथ लगातार हो रहे अपमान को देखते हुए हम आज से जिला स्तरीय सभी कार्यक्रमों और जनसंपर्क की खबरों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करते हैं। जब तक प्रशासन अपना रवैया नहीं बदलता और पत्रकारों को उचित सम्मान व सहयोग नहीं देता, यह निर्णय जारी रहेगा।”

संभावित असर

जिला स्तरीय योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों की सूचनाएँ आम जनता तक नहीं पहुँच पाएंगी। प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद की कमी से पारदर्शिता प्रभावित होगी। आम जनता सरकारी नीतियों और कामकाज की जानकारी से वंचित हो सकती है।

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