
छत्तीसगढ़-बलरामपुर || आपको बता दें कि पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले वाड्रफनगर विकासखंड है जहां वाड्रफनगर विकासखंड में पदस्थ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी B.M.O जिसे अपनी ईमानदारी की सजा मिल रही है और कुछ मनमाना राज चलानें की इच्छुक मेडिकल स्टाफ और उनकी सीनियर के द्वारा बीएमओ हेमंत दीक्षित के उपर आए दिन आरोप प्रत्यारोप का दौर खत्म होने का नाम नहीं ही ले रहा है।

जहां आज कई अस्पताल हैं जहां मेडिकल स्टाफ की कमी है और जिसके चलते जरूरतमंदों को सही समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है उसी स्थिति को सुधारने की जद्दोजहद कर रहा एक बीएमओ आज झूठे आरोप और बदनामी का खामियाजा भुगत रहा है।
एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के कारण हम कई बार देखते हैं कि मरीजों को एंबुलेंस तक नहीं मिल पाता है स्वास्थ्य सुविधा तो बहुत दूर की बात है ऐसी स्थिति के कारण स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर आम जन के मन में काफी निराशा होती है लेकिन वाड्रफनगर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित के द्वारा भरपूर प्रयास किया जा रहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए और लोगों को सही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए यह कोई गलत नहीं है बल्कि एक अधिकारी का कर्तव्य है जिसका पालन करना खंड चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित को महंगा पड़ रहा है।
जब कोई सुस्त रवैया वाला अधिकारी आता है तो बहुत सारे कामचोर कर्मचारी खुश हो जाते हैं क्योंकि कामचोर अधिकारी के आने से किसी प्रकार की तेजी देखने को नहीं मिलती है जिसके चलते कर्मचारियों में एक रौनक सी आती है की काम बहुत काम करना पड़ता है या यूं कहना नहीं के बराबर करना पड़ता है फिर भी उनका वेतन उतना ही होता है जितना ईमानदारी पूर्वक अपना काम करने से मिलने ऐसा ही प्रकरण वाड्रफनगर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित के साथ हो रहा है यदि हेमंत दीक्षित सुस्त रवैया के अधिकारी होते तो उनके अधीनस्थ कुछ कर्मचारी जिन्हें सेवा भाव से काम करने के बजाय केवल अपने वेतन से मतलब होता है और जिन्हें अपने सामने गंभीर अवस्था वाले मरीज को देखकर के भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है वह बहुत खुश होते लेकिन इसके विपरीत अपने कार्य के प्रति सजग और ईमानदार खंड चिकित्सा अधिकारी के आने के कारण कुछ चुनिंदा कर्मचारियों में काफी निराशा है क्योंकि उन्हें अपने जॉब रोल का सही से पालन करना पड़ रहा है।
जब कुछ ना हो पाए तो अधिकारी के ईमानदारी व वफादारी पर उठनें लगे सवाल
अक्सर देखनें को मिलता है कि जब गंभीर से गंभीर झूठे आरोप लगाने के बाद भी अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती है तो उसके प्रभुत्व पर ही सवाल उठने लगते हैं ऐसा ही मामला वाड्रफनगर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित के साथ हो रहा है आपको बता दें की लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधा दिलाने की ओर सदैव अग्रसर रहनें वाले वाड्रफनगर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी हेमंत दीक्षित पर आजकल आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है जब कुछ लोगों का मन हेमंत दीक्षित की मान मर्यादा पर उंगली उठाकर भी नहीं बना तो उन लोगों के द्वारा जांच में अधिकारियों की कार्यशैली पर ही सवाल उठने लगे हैं। कुछ कर्मचारी और संघ के द्वारा डॉक्टर हेमंत दीक्षित पर आरोप लगाए गए थे जिसकी जांच जिला स्तरीय टीम के द्वारा किया गया था जिसमें जिला के चुने हुए कुछ लोग आए और जांच किया जिससे संतुष्ट होकर कुछ कर्मचारियों के द्वारा अब यह आरोप लगाया जा रहा है की डॉक्टर हेमंत दीक्षित के द्वारा इस जांच को प्रभावित किया जा रहा है और अपने पक्ष में जांच रिपोर्ट तैयार करवाया जा रहा है। यदि इन आरोपों को मन भी ले तो इसका कोई प्रमाण कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टाफ कहां से देंगे और अपने बात को कैसे सही साबित करेंगे।
आरोप लगाना आसान है पर सिद्ध करना बहुत मुश्किल
किसी के ऊपर भी कोई आरोप लगाना बहुत छोटी और आसान सी चीज है लेकिन उसे अब को सिद्ध करना और अपने द्वारा लगाया गया आप के पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करना काफी कठिन होता है और खास करके तब जब आप झूठ और बेबुनियाद हो क्योंकि किसी ने सही कहा है कि झूठ के पैर नहीं होते हैं। जिन मेडिकल स्टाफ के द्वारा डॉक्टर हेमंत दीक्षित के ऊपर आरोप लगाया जा रहा है कि उनके द्वारा जांच टीम को अपने प्रभुत्व के बल पर प्रभावित किया जा रहा है वह कैसे सही हो सकता है यह सोचने वाली बात है क्योंकि ना तो हेमंत दीक्षित किसी राजनीतिक पार्टी से हैं और नहीं डॉक्टर हेमंत दीक्षित के चाचा विधायक है, अगर इन आरोप लगाने वाले लोगों के पास कोई सबूत होता तो उसे प्रस्तुत किया जा चुका होता लेकिन आरोप तो लोग किसी पर भी लगा सकते हैं उसमें कोई GST थोड़ी ना लगती है।
स्वास्थ्य शिविर और जरूरतमंदों की सेवा इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं डॉक्टर हेमंत दीक्षित
बीते दिनों में डॉक्टर हेमंत दीक्षित के कारण स्वास्थ्य सुविधा में सुधार हुआ है और कसावट भरी सुविधा जरूरतमंदों को मिल रही है जिससे गरीब और आमजन को एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल पा रही है हालांकि इन सुविधाओं के बीच बहुत सारे ऐसे लोग भी हैं जिन्हें काम करना पसंद नहीं है केवल अपना वेतन सही समय पर मिले यही उन चुनिंदा लोगों की पहली पसंद होती है लेकिन जब से डॉक्टर हेमंत दीक्षित ने अपना कार्यभार संभाला है तब से स्वास्थ्य सुविधा में सावत देखने को मिल रही है और लोगों को सही ढंग से सही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पा रही है इसी के चलते परेशान और नाराज कुछ कर्मचारी हैं जो चाहते हैं कि ऐसा अधिकारी उनके बीच ना रहे और उन्हें ऐसा अधिकारी मिले जिसे केवल अपने वेतन से मतलब हो ना कि कम से जिसके चलते डॉक्टर हेमंत दीक्षित पर पहले तो यार बोलने जैसे मामूली से बात पर डॉक्टर हेमंत दीक्षित के खिलाफ आवेदन दिया जाता है और अब तो हद बात की हो गई है कि जिला के द्वारा आए गए जांच टीम पर ही सवाल उठने लगे हैं। जबकि अगर हेमंत दीक्षित जिला की जांच टीम को प्रभावित कर सकते हैं तो वह उसे अधिकारी को भी प्रभावित कर सकते थे जिसे जांच के आदेश दिए थे अगर डॉक्टर हेमंत दीक्षित इतने ही प्रभावशाली व्यक्ति हैं तो उनके खिलाफ हो रहे जांच को ही रोक देते और अपने प्रभुत्व की एक मिसाल पेश करते हैं, लेकिन जब कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टाफ की मनसा पूरी नहीं हुई तो उनके द्वारा जांच टीम पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस विषय पर कुछ जानकार बताते हैं कि डॉक्टर साहब को केवल अपना काम इमानदारी से करना आता है और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में उन्होंने जितना किया है उतना शायद ही अब तक वाड्रफनगर में किसी अधिकारी ने किया होगा। यही वह कारण है कि लोग हेमंत दीक्षित जैसे डॉक्टर के ऊपर उंगली उठा रहे हैं।
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों और अन्य लोगों के लिए समर्पित डॉक्टर हेमंत दीक्षित के ऊपर उंगली उठाए काफी निराशाजनक है क्योंकि जिन लोगों ने डॉक्टर दीक्षित के विरुद्ध झूठी आरोप लगा करके उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है और इस खंड चिकित्सा अधिकारी के पद से उन्हें हटाकर अपना मनमाना राज्य स्थापित करना चाहते हैं।

स्वास्थ्य कर्मचारी पहले ही कर चुका है बीएमओ हेमंत दीक्षित पर लगे आरोपों का खंडन
बीएमओ हेमंत दीक्षित पर लगे आरोपों का खंडन पहले ही मेडिकल स्टाफ के द्वारा किया जा चुका है और कलेक्टर बलरामपुर को इस संबंध में बहुतायक संख्या में मेडिकल स्टाफ के द्वारा एक आवेदन भी दिया गया है। इसी बात से झूठे आरोप लगाने वालों की पोल खुल कर रह गई है और जांच पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अगर जांच टीम गलत है तो इसका सीधा मतलब अपने ही विभाग पर उंगली उठाना और अपने ही विभाग की फजीहत करना है,जो लोग अपने विभाग के जांच टीम पर बिना आधार उंगली उठा रहे हैं वो अपने बीएमओ पर उंगली कैसे नहीं उठाएंगे। जांच टीम पर उंगली उठाना सीधे तौर पर अपने विभाग को सवालों के घेरे में लेना हैं क्योंकि जो अधिकारी जांच के लिए आए थे और जो आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं वो दोनों ही एक ही विभाग से हैं। जांच टीम और बीएमओ के समर्थन में बहुसंख्या में आए लोग कैसे गलत हो सकते हैं इतने सारे लोग गलत कैसे गलत हो सकते हैं,यह आम जन समझ सकती है कि एक अधिकारी को हटानें के लिए कैसी गतिविधियां की जा रही है।














